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रविवार, 23 जून 2013

    
 

*** तुम ***



तुम देखती तो हो
मगर मेरे भीतर तक नहीं,
तेरी साँसों की गर्माहट
सिर्फ़ महसूस कर सकता हूँ.

हवा हो जाती है
मेरे साथ तेरी उत्तेजना,
तेरा हर अंदाज़ अब मुझे
सतही लुत्फ़ देता है.

तेरे साथ ने पराया कर दिया
मुझसे मेरी परछाई को,
मैं कह तो रहा हूँ
बदल गया है सब कुछ.

गुनाह सिर्फ़ मेरा है
तुम्हारे छिछलेपन के पीछे,
डूब तो मैं गया हूँ
तेरे प्यार की गहराई में ...!***

              --- अमिय प्रसून मल्लिक


*** Picture courtesy by Travis K. Schwab - Oil on canvas 14” X 11” 

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