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शुक्रवार, 28 सितंबर 2007

मैं नहीं आने देता


मैं नहीं आने देता चेहरे पर मायूसी को,
पर बात कोई अपनी छिपाना नहीं सीखा ।

तुम क्यूँ पूछो कभी मेरे बेज़ार दिल का हाल
मैं आवारा तो ज़माने भर से भटकता फिरा हूँ,
तुम्हारी निगाहों में छाने का माना मेरा शौक़ रहा
पर उठ- उठकर अपनी ही नज़र में हर बार गिरा हूँ ।

आँखों में अपनी तेरे प्यार का भरम रखने लगा हूँ,
जब से तेरे सपनों वाली अधखुली नींदों से जागने लगा हूँ ।

दिल मेरा पागल है, दीवाना है आधी- अधूरी चीज़ों का
और मासूम नींदों ने भी कोई और सपना दिखाना नहीं सीखा,

मैं नहीं आने देता चहरे पर मायूसी को,
पर बात कोई अपनी छिपाना नहीं सीखा ।


मैं क्यूँ न तेरे साए में खुद को कर दूँ खाक़
बस तू ही जबकि मेरे जीवन की ठोस धरा है,
माना कि बुलंदियों पर मेरी आज सत्ता है कायम
पर फ़लक से टूटकर हर तारा यहीं तो आकर मरा है !


साँसों में अपनी क्यूँ तेरी गरमाहट खोजने लगा हूँ,
सच तो यह है, अपने घाव ख़ुद ही नोचने लगा हूँ !
लाख मैं दिल को किसी तरह दे दूँ दिलासा
हथेलियों में लिखी लकीरों को मिटाना नहीं सीखा ।


मैं नहीं आने देता चहरे पर मायूसी को,
पर बात कोई अपनी छिपाना नहीं सीखा ।



- "प्रसून"

8 टिप्‍पणियां:

Shashi Anand ने कहा…

gr88888888888888
yaar yadi ye aapki rachna hai to hats off to u yaar
aur plz bura nahi maanna maine "yadi" shabd ka istemaal kiya hai.

shashi anand
9316070006

Shashi Anand ने कहा…

काश मैं भी आपकी तरह शब्दो का इतना बड़ा जादूगर होता तो जवाब में कुछ अच्छा सा लिख के भेजता
खैर साधारण शब्दो में ये तो कह ही सकता हु की बहुत अच्छा लिखते हो आप और मैं भी आपके इन विचारो से इतेफाक रखता हु

aanch ने कहा…

tu zamane ko chahat ka anjaam pehchan jane de...
kyun chipata hai haqiqat
mayusi shouk se chehre par nazar aane de....

meri dost ritu ke yeh shabd aapke ki kavita ka jawab sa mehsoos hote hai...
par sach much aapne bahut acha likha hai...

aanchal

पार्थ जैन ने कहा…

अमिय जी अब मैं आपकी रचनाऒं के बारे में क्या प्रतिक्रीया दूं,आपके बारे में कुछ कहना ”सुरज को दिया दिखाने के समान है”......
वाकई आपने बहुत ही अच्छा लिखा है,मजा आ गया,इसी प्रकार दर्द भरी कविताऎं लिखते रहें!!!!!!!!

pragsavee ने कहा…

bahut sunder..Prasoon ji!

ritu ने कहा…

mayusi dil me chipana hai
mehfil me muskurana hai,
ajab mohbat ka zamana hai...
kuch kuch jatana hai
sab kuch chipana hai,
kasmkash se bhra
zindgi ka fasana hai...

yaar aapne galat shaks ko chuna hai raaye dene ke liye...aapki kavita kahi jayda tarif ke kabil hai....aur mera shabd kosh bahut chota hai....phir bhi kahungi....yeh aapki behtreen me se ek hai...

nityanand ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
nityanand ने कहा…

मैं नहीं आने देता चेहरे पर मायूसी को, ..........kitni sahi kabiliyat hai aapme....
पर बात कोई अपनी छिपाना नहीं सीखा .......pahle sentence me jo kabiliyat dikhaya .....wo zero ho gaya......contradiction.......


padne se lagta hai koi apni PREM ko darsha raha hai.......BUT.....दिल मेरा दीवाना है आधी- अधूरी चीज़ों का......ye sentence aapke[ye kawita jise represent kar rahi hai] PYAR pe hi QUESTION MARK laga raha hai......aap jise chahte hain wo CHIJ AADHI-ADHURI hai....
मैं आवारा .............अपनी ही नज़र में हर बार गिरा हूँ ...........दिल मेरा पागल है...............अपने घाव ख़ुद ही नोचने लगा हूँ ....and......हथेलियों में लिखी लकीरों को मिटाना नहीं सीखा .......
aise aadmi ki ..सत्ता ...बुलंदियों पर.. ho nahi sakti......

sabdon ka bikhra hua collection...a little bit confused
....boiled chicken......

sorry prasun jee ..but maza nahi aaya...

with love,
nityanand
hindalco industries limited
sambalpur,orissa,09861691137...